जीवन की सच्चाई

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  एक दिन सबको इस दुनिया को छोड़कर जाना हैं यही जीवन की सबसे बड़ी सच्चाई हैं इसलिए किसी शायर ने कहा हैं की          जी लें जिंदगी ख़ुशी  की तलाश ना कर जो इस पल मिल रहा हैं उसको खोकर                 अपने जीवन को निराश मत कर ये  जिंदगी मेरे शब्दों  से मेरा किरदार मत समझना, क्योंकि मैंने लिखा वही हैं, जो लोंगो को महसूस करते देखा हैं | इसलिए तू मूझे  अपना किरदार समझ  कर निराश मत कर इसलिए जीवन की सच्चाई  यही हैं जिंदगी से इतनी गहरी हमेशा  के लिये थोड़ी ही यह हम पर आकर  ठहरी हैं कल अच्छा होने की चाहत  में वहम  पर भी भरोसा  होने लगता हैं इसलिए ये मत सोंचो की कल अच्छा होगा या नहीं तुम हमेशा  आज के लिये अच्छा करने की कोशिश करो  क्योंकि जब तुम कल के लिये आज ही कर लोगे तो आपको ये वहम ही नहीं होगा की कल अच्छा होगा इसलिए  कहते हैं की              जिंदगी रहती हैं  गुमनाम, हर मोड़ से नहीं करती हैं अपनी पहचान!! जीवन की सच्चाई

ज़िंदगी की कुछ अनोखी बातें ?


 सुबह की राम राम ..🙏🚩🌞#जय_सूर्यदेव_जी🌞🚩🙏

🚩🌞"#नमः_सूर्याय_शान्ताय_सर्व_रोग_विनाशिने❗

🚩🌞#आयु_आरोग्यं_ऐश्वर्यं_देही_देव_नमोस्तुते "‼

 🌞#ॐ_ह्रां_ह्रीं_ह्रों_सः_सूर्याय_नमः🌞।।🚩

#जय_श्रीराम🙏

#सुप्रभात_वंदन🌞🌷

शुभ रविवार!आप सभी का दिन मंगलमय हो🌺

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: ॐ सूर्याय नम:, सुप्रभात वंदनम एक नया दिन नई शुरुआत किजीए और सुरक्षित स्वस्थ और प्रसन्न रहे यही शुभकामना है 🙏🚩

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॥ अथ सूर्यकवचम ॥

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श्रणुष्व मुनिशार्दूल सूर्यस्य कवचं शुभम्।

शरीरारोग्दं दिव्यं सव सौभाग्य दायकम्॥

देदीप्यमान मुकुटं स्फुरन्मकर कुण्डलम।

ध्यात्वा सहस्त्रं किरणं स्तोत्र मेततु दीरयेत्॥


शिरों में भास्कर: पातु ललाट मेडमित दुति:।

नेत्रे दिनमणि: पातु श्रवणे वासरेश्वर:॥


ध्राणं धर्मं धृणि: पातु वदनं वेद वाहन:।

जिव्हां में मानद: पातु कण्ठं में सुर वन्दित:॥


सूर्य रक्षात्मकं स्तोत्रं लिखित्वा भूर्ज पत्रके।

दधाति य: करे तस्य वशगा: सर्व सिद्धय:॥


सुस्नातो यो जपेत् सम्यग्योधिते स्वस्थ: मानस:।

सरोग मुक्तो दीर्घायु सुखं पुष्टिं च विदंति॥


🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

You were born into this life equipped to succeed.

You are a part of God’s perfect plan. Yes, you.

The plan would not be perfect if you were missing.

Think about that. You matter more than you know.


Today and every day share something with the world,

“A Smile”. Teach someone to smile and teach them how

To hope. Give someone a smile and give them hope.


Live well love more smile laugh a lot spread happiness and cheer

BE BLESSED!

“If you are working on something that you really care about, you don’t have to be pushed. The vision pulls you.”

Shree Krishna said:

He who is devoted to the path of action,  whose mind is quite pure,  who has conquered the self (ego),  who has subdued his senses  and  who realises his Self (Soul) as the Self in all beings,  though acting,  he is not tainted (by the fruits of his actions)🙏

: *जीवन में कई बार हम बड़ी - बड़ी परेशानियों से यूं निकल जाते हैं, मानो कोई है जो हमारा साथ दे रहा है, उसी अदृश्य शक्ति को हम परमात्मा एवं कर्म का फल कहते हैं।।*

                🙏🙏*प्रभु को न खोएँ*


लेख सार : जीवन में सब कुछ खो दें पर प्रभु को कभी नहीं खोना चाहिए । प्रभु जीवन में रहेंगे तो सब खोई चीजें जीवन में वापस मिल जाएगी । पर अगर प्रभु को खो दिया तो हमने सब कुछ खो दिया ।

श्रीमद्भगवगीता में भक्तों की श्रेणी का जिक्र और इन सभी को भगवान द्वारा उदार बताना अर्थात ईश्वर से किसी भी रूप में प्रेम करने के कारण महान कहना।तथापि एक ज्ञानी भक्त को अपनी आत्मा निरूपित करना और उससे भी आगे वासुदेव ही सब कुछ है,सर्वत्र है ऐसे ज्ञानी भक्त को एक दुर्लभ महात्मा की उपाधि से विभूषित करना।

चतुः विधाः भजन्ते मां जनाः सुकृतनः अर्जुन।आर्तः जिज्ञासुः अर्थाथी ज्ञानी च भरतर्षभ्। 

तेषां ज्ञानी नित्ययुक्तः एक भक्तिः विशिष्यते।प्रियः हि ज्ञानिनः अत्यर्थम् अहम् सः च मम प्रियः।

उदाराः सर्वे एव ऐते ज्ञानी तु आत्मा एव मे मतं।आस्थितः सः हि युक्त आत्मा माम् एव अनुत्तमां गतिम् 

बहूनां जन्मनां अन्ते ज्ञानवान् मां प्रपध्यते।वासुदेवः सर्वम् इति सः महात्मा सुदुर्लभः।श्रीमद्भगवद्गीता ७/१६-१९। 

भावार्थ - हे भरत श्रेष्ठ चार प्रकार के भक्त मुझे भजते हैं।पहले तो आर्ती अर्थात जो कि अत्यंत दीन और दुखी हैं।दूसरे जिज्ञासु अर्थात सत्य की खोज करने वाले (यह ब्रह्माण्ड कैसे आया,किसने बनाया।मैं कौन हूँ,वह ईश्वर और सत्य क्या है वगैरह वगैरह)।तीसरे धन धान्य की कामना करने वाले और अंत में चौथे ज्ञानी।इन सभी में ज्ञानी भक्त मुझे सबसे अधिक प्रिय है क्योंकि वह पूर्ण रूप से मेरे ही शरणागत है और मुझ वासुदेव को ही भज रहा है और सिर्फ मुझ से ही प्रेम कर रहा है जैसा कि मैं उससे।इन सभी भक्तों को मैं उदार मानता हूँ क्योंकि ये सभी मुझसे सम्बन्ध रखते हैं,मेरा स्मरण करते हैं।तथापि इन सब में ज्ञानी तो मेरी आत्मा है क्योंकि वह प्रेमपूर्वक मुझ से जुड़कर मुझ में ही दृढ़तापूर्वक अति उत्तमता से स्थित है।बहुत जन्मों के अंत के जन्म में एक ज्ञानी कि वासुदेव अर्थात कृष्ण (श्री हरिः या नारायण) ही सब कुछ हैं,ऐसा महात्मा अत्यंत दुर्लभ है।श्रीमद्भगवद्गीता ७/१६-१९।

 🙏 आज का विचार🙏

.. भारत में #रविवार की छुट्टी किस व्यक्ति ने  दिलाई? 

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रविवार की छुट्टी के पीछे उस महान व्यक्ति का क्या मकसद था? जानिए क्या है इसका इतिहास।


साथियों, जिस व्यक्ति की वजह से हमें ये छुट्टी हासिल हुयी है, उस महापुरुष का नाम है "नारायण मेघाजी लोखंडे". नारायण मेघाजी लोखंडे ये जोतीराव फुलेजी के सत्यशोधक आन्दोलन के कार्यकर्ता थे। और कामगार नेता भी थे। अंग्रेजो के समय में हफ्ते के सातो दिन मजदूरो को काम करना पड़ता था। लेकिन नारायण मेघाजी लोखंडे जी का ये मानना था की, हफ्ते में सात दिन हम अपने परिवार के लिए काम करते है। लेकिन जिस समाज की बदौलत हमें नौकरिया मिली है, उस समाज की समस्या छुड़ाने के लिए हमें एक दिन छुट्टी मिलनी चाहिए। उसके लिए उन्होंने अंग्रेजो के सामने 1881 में प्रस्ताव रखा। लेकिन अंग्रेज ये प्रस्ताव मानने के लिए तयार नहीं थे। इसलिए आख़िरकार नारायण मेघाजी लोखंडे जी को इस sunday की छुट्टी के लिए 1881 में आन्दोलन करना पड़ा। ये आन्दोलन दिन-ब-दिन बढ़ते गया। लगभग 8 साल ये आन्दोलन चला। आखिरकार 1889 में अंग्रेजो को sunday की छुट्टी का ऐलान करना पड़ा। ये है इतिहास। 

क्या हम इसके बारे में जानते है? 

अनपढ़ लोग छोड़ो लेकिन क्या पढ़े लिखे लोग भी इस बात को जानते है? 

जहा तक हमारी जानकारी है, पढ़े लिखे लोग भी इस बात को नहीं जानते। अगर जानकारी होती तो sunday के दिन enjoy नहीं करते....समाज का काम करते....और अगर समाज का काम ईमानदारी से करते तो समाज में भुखमरी, बेरोजगारी, बलात्कार, गरीबी, लाचारी ये समस्या नहीं होती। 

साथियों, इस sunday की छुट्टीपर हमारा हक़ नहीं है, इसपर "समाज" का हक़ है। कोई बात नहीं, आज तक हमें ये मालूम नहीं था लेकिन अगर आज हमें मालूम हुआ है तो आज से ही sunday का ये दिन सामाजिक कार्यों के लिए समर्पित करें.!!

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