जीवन की सच्चाई
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अपनी भविष्य को लेकर इतना चिंतित हो जाता हैं की वह वर्त्तमान का आंनद नहीं ले पाता हैं इसका नतीजा यही होता हैं की ना तो वह वर्तमान में जी पाता हैं और ना ही भविष्य में जी
पाता हैं | वह ऐसे जीता हैं जैसे वह कभी नहीं मरने वाला हो और फिर बिना जिए यानि की जीवन का आंनद लिये बिना ही मार जाता हैं | ऐसे जीवन को सफल जीवन नहीं मना जा सकता | इस पल में जियें इसका भरपूर आंनद लें यही सच्ची सफलता हैं |
* जीवन में आपका लछ्य दूसरों से बेहतर बनना नहीं होना चाहिए | बल्की अपने ही पिछले स्वरूप बेहतर बनना लछ्य चाहिए |खुद पर जीत हांसिल करना, किसी युद्ध में हजारों लोगो पर जीत हांसिल करने से कही बडी जीत होती है|
*मै मानता हूँ की सभी इंसान एक ही प्रकीर्ति के होते हैं |मानसिक एवं भावनात्मक स्तर पर सभी सामान हैं | हम सभी में खुश रहने और अच्छा इंसान बनने की छमता हैं |जरुरी यह हैं की हम अपने अंदर की सकारात्मक और उपयोगी पहलु को प्रोत्साहित करें तथा नकारात्मक पहलु को काम करने की कोशिश करें |
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