जीवन की सच्चाई

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  एक दिन सबको इस दुनिया को छोड़कर जाना हैं यही जीवन की सबसे बड़ी सच्चाई हैं इसलिए किसी शायर ने कहा हैं की          जी लें जिंदगी ख़ुशी  की तलाश ना कर जो इस पल मिल रहा हैं उसको खोकर                 अपने जीवन को निराश मत कर ये  जिंदगी मेरे शब्दों  से मेरा किरदार मत समझना, क्योंकि मैंने लिखा वही हैं, जो लोंगो को महसूस करते देखा हैं | इसलिए तू मूझे  अपना किरदार समझ  कर निराश मत कर इसलिए जीवन की सच्चाई  यही हैं जिंदगी से इतनी गहरी हमेशा  के लिये थोड़ी ही यह हम पर आकर  ठहरी हैं कल अच्छा होने की चाहत  में वहम  पर भी भरोसा  होने लगता हैं इसलिए ये मत सोंचो की कल अच्छा होगा या नहीं तुम हमेशा  आज के लिये अच्छा करने की कोशिश करो  क्योंकि जब तुम कल के लिये आज ही कर लोगे तो आपको ये वहम ही नहीं होगा की कल अच्छा होगा इसलिए  कहते हैं की              जिंदगी रहती हैं  गुमनाम, हर मोड़ से नहीं करती हैं अपनी पहचान!! जीवन की सच्चाई

कभी किसी चीज को छोटा मत समझो!

         


  कभी -कभी मुझको  रहीमदास  जी का एक दोहा याद आ जाता हैं की -

                    रहिमन  देख  बडेन को लघु  ना दीजे टारि|

                     जहाँ  काम आवे  सुई काह करें तलवार!

अर्थात रहीमदास जी ने इस दोहे मे साफ- साफ  कह  दिया हैं की हमको कभी भी किसी बड़े  चक्करों  मे फसकर  छोटों  का तिरस्कार नहीं  करना चाहिए, क्यूंकि कभी  भी  सुई के काम के जगह  पर तलवार काम नहीं  करती हैं| हमको छोटे  और बड़ों को एक सामान देखना चाहिए! इस संसार  मे छोटा कोई नहीं  होता हैं छोटी  केवल हमारी सोंच होती है|

आज के युग मे इंसान  इतना स्वार्थी हो गया हैं की जब वह  काम लगता हैं की तभी याद करता  हैं नहीं  तो ऐसे लगता हैं की वह तुमको जानता  तक  नहीं! हमको ऐसा कभी नहीं करना चाहिए  हमेशा  छोटे बड़ों का सम्मान करना चाहिए  |इसलिए इंसान को कभीबकीसी चीज  को छोटा नहीं समझना चाहिए क्यूंकि

                

           कभी किसी चीज को छोटा मत  समझो !

      हजारो कपडे शोरूम  मे लटकते रह  गए ,

           छोटा सा मास्क करोडो का  व्यापार  kar गया !

महाभारत  मे कौरवों  की संख्या  कितनी थी  फिर भी चाहकर  भी ओ लोग महाभारत  नहीं  जीत पाए  इसका  कारण  यही  था की उन लोगों  को अपनी सन्य ताकत  पर अभिमान  हो गया  था  की उनकी ताकत बहुत  ज्यादा हैं और उन्हें पांडव  चाहकर  भी  नहीं  हरा  सकते लेकिन परिणाम  कुछ  उलटा ही हो गया| अतः  आज से ही संकल्प लो की कभी  किसी को अपने से तुच्छ नहीं समझोगे!

धन्यवाद!!





    

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