जीवन की सच्चाई
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जीवन में मधुरता की खुशबु लेने के लिए सहनशीलता का गुण धारण करना जरुरी है। अब सहनशीलता के गुण को अपना निजी संस्कार बनाकर सहनशीलता के देव वा देवी बनो। जब कहते हो मैं आत्मा शान्त स्वरूप हूँ, तो शान्त स्वरूप होकर रहना, सहनशील बनना -- इसे अपना संस्कार बना दो।इस टाइटल व स्वमान की स्मृति से बड़ी बात भी छोटी बन जाती है।
मुश्किल आने पर दूसरों को दोषी ठहराने की बजाय अपनी गलतियों को चेक कर ठीक करना सीखे।
आमतौर पर जब भी कोई मुश्किल आती है तो हम लोग एक दूसरे के ऊपर उंगली उठाना शुरू कर देते हैं। और वह मुश्किल और विकराल रूप धारण कर लेती है। जब की जरूरत उस समय धैर्य से अपने द्वारा की गई गलती को चैक कर उसे सुधारना होता है। इसलिए परमात्म परखने की शक्ति द्वारा अपने अच्छे- बुरे, गलत- सही की पहचान करें और सदैव सही निर्णय ले खुशहाल जीवन को अपनाएंगे।
अपनी हर मुश्किल की वजह जो तू दूसरों को बनाएगा,उनसे ज्यादा दोषी तू खुद पाया जाएगा।खुद के अंदर झांक जो तू अवगुणों को निकालेगा।
गुणों की सुंदर खुशबू से सारा आंगन महकाएगा।
क्यूँकि जीवन का यही रहस्य है -
जीवन का एक रहस्य...
रास्ते पर गति की सीमा है।
बैंक में पैसों की सीमा है।
परीक्षा में समय की सीमा है
परंतु हमारी सोच की कोई सीमा नहीं, इसलिए सदा श्रेष्ठ सोचें और श्रेष्ठ पाएँ।
अपनी सोच को सकारात्मक और शक्तिशाली बनाएँ...
धन्यवाद।
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